मतदान से पहले 48 घंटे की ‘मौन अवधि’ के लिए ओडिशा मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दिशा-निर्देश जारी

PNS Bureau ;-स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने तथा मतदाताओं के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ओडिशा ने मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पूर्व की अवधि — जिसे आमतौर पर ‘मौन अवधि’ (Silent Period) कहा जाता है — के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सभी संबंधित पक्षों द्वारा किया जाना अनिवार्य होगा।
🕓 1. मौन अवधि
मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले की अवधि को मौन अवधि कहा जाता है। इस दौरान मतदाताओं को किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या प्रलोभन से मुक्त रखकर स्वतंत्र रूप से मतदान का निर्णय लेने का अवसर दिया जाता है।
मौन अवधि शुरू होने से पहले सभी प्रकार के प्रचार कार्यों को पूरी तरह समाप्त कर देना होगा।
🚫 2. बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर रोक
सभी राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता, जिन्हें चुनावी क्षेत्र के बाहर से लाया गया है, प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित क्षेत्र में रह नहीं सकते।
जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक, नुआपाड़ा को निम्न निर्देश दिए गए हैं:
- (क) कल्याण मंडप / सामुदायिक भवन आदि में किसी बाहरी व्यक्ति की उपस्थिति की जांच करें।
- (ख) सभी लॉज और अतिथि गृहों की अतिथि सूची का सत्यापन करें।
- (ग) सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित कर बाहरी वाहनों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखें।
- (घ) सुनिश्चित करें कि निर्वाचन क्षेत्र में केवल स्थानीय मतदाता ही रह रहे हों और पहचान पत्रों की जांच करें।
छूट का प्रावधान:
यदि कोई राजनीतिक व्यक्ति चिकित्सकीय कारणों से क्षेत्र छोड़ने में असमर्थ हैं, तो जिला निर्वाचन अधिकारी एक मेडिकल बोर्ड गठित करेंगे और यह मामला केवल निर्वाचन आयोग की अनुमति से ही विचाराधीन होगा।
ऐसे व्यक्तियों को वीडियो निगरानी में रखा जाएगा और किसी भी राजनीतिक गतिविधि से पूरी तरह दूर रहना होगा।
🗣️ 3. जनसभा और प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पूर्व निम्न गतिविधियाँ सख्ती से निषिद्ध रहेंगी:
- (क) कोई भी जनसभा, रैली या जुलूस आयोजित करना, उसमें शामिल होना या संबोधित करना।
- (ख) सिनेमा, टेलीविज़न या किसी अन्य माध्यम से चुनावी सामग्री का प्रदर्शन।
- (ग) संगीत, सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन जो मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।
इन प्रावधानों के उल्लंघन पर दो वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
📺 4. मीडिया कवरेज पर नियंत्रण
- टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म: किसी भी चुनाव-संबंधी सामग्री या दृश्य, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रभावित करना है, का प्रसारण या प्रदर्शन वर्जित रहेगा।
हालांकि, सामान्य राजनीतिक समाचार जिनसे मतदाता प्रभावित नहीं होते, उनका प्रसारण अनुमत है। - रेडियो प्रसारण: धारा 126 के अनुसार, रेडियो को “समान माध्यम” माना गया है। अतः मौन अवधि में किसी भी चुनावी सामग्री का प्रसारण वर्जित रहेगा।
📰 5. मुद्रित मीडिया में राजनीतिक विज्ञापन
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 127A के अंतर्गत —
- (क) प्रत्येक चुनावी पोस्टर या पैम्फलेट पर मुद्रक और प्रकाशक का नाम व पता स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
- (ख) मुद्रक को प्रकाशित सामग्री और घोषणा की प्रतिलिपि मुख्य निर्वाचन अधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी।
इसके अतिरिक्त, मीडिया प्रमाणीकरण एवं मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) द्वारा पूर्व-स्वीकृति के बिना मतदान दिवस या उससे एक दिन पहले किसी भी राजनीतिक विज्ञापन का प्रकाशन निषिद्ध रहेगा।
इसका उद्देश्य चुनाव के संवेदनशील चरण में किसी भी भ्रामक या भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोकना है।
🌐 6. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग
सभी राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को सलाह दी गई है कि वे 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान फेसबुक, X (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब आदि पर कोई भी चुनावी या राजनीतिक सामग्री पोस्ट न करें।
डिजिटल माध्यम से मतदान की अपील, राजनीतिक प्रचार, या मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास को धारा 126 का उल्लंघन माना जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ओडिशा ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करें, किसी भी चुनाव-प्रभावित करने वाली पोस्ट या संदेश को शेयर या फॉरवर्ड न करें, और मतदाताओं के लिए शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और समावेशी वातावरण बनाने में सहयोग दें।
📢 मुख्य संदेश:
“मौन अवधि का सम्मान करें, लोकतंत्र को सशक्त बनाएं।”
(PNS)




