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राजभवन में जनजातीय गौरव दिवस तथा उत्तराखंड और झारखंड स्थापना दिवस मनाया गया राज्यपाल ने देश की एकता बनाए रखने का किया आह्वान

PNS Bureau :-भुवनेश्वर, 15 नवम्बर।
राजभवन में आज जनजातीय गौरव दिवस, उत्तराखंड स्थापना दिवस और झारखंड स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर ओडिशा के माननीय राज्यपाल डॉ. हरी बाबू कम्भमपति ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश की एकता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है, और हमें किसी भी चुनौती का सामना एकजुट होकर करना चाहिए।

उत्तराखंड स्थापना दिवस और
झारखंड स्थापना दिवस
झारखंड स्थापना दिवस
झारखंड स्थापना दिवस

बिरसा मुंडा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस – राज्यपाल ने किया भावपूर्ण स्मरण

राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस झारखंड के महान जननायक, स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के अदम्य साहस, बलिदान और प्रेरणादायी योगदान को याद करने का दिन है।
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश अत्याचारों के विरुद्ध जनजातीय समुदाय में चेतना जगाई, आत्मसम्मान और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन आज भी न्याय, समानता और आत्मसम्मान के लिए प्रेरणा देता है।

राज्यपाल ने इस दिवस को पूरे देश में मनाने की पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दृष्टि की सराहना की और कहा कि यह कदम भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत और देश निर्माण में जनजातीय समुदाय के योगदान का सम्मान करता है।


उत्तराखंड और झारखंड स्थापना दिवस पर बधाई

कार्यक्रम में राज्यपाल ने दोनों राज्यों के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा—

  • उत्तराखंड, देवभूमि, दिव्य पर्वतों, पवित्र नदियों और केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे तीर्थस्थलों की भूमि है। उत्तराखंड की गरवाली और कुमायूँ सांस्कृतिक परंपराएँ प्रकृति के साथ समरसता और आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं।
  • झारखंड खनिज संपदा, हरियाली, जनजातीय संस्कृति और वीर बिरसा मुंडा की जन्मभूमि है, जिनके संघर्ष ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। झारखंड की समृद्ध परंपराएँ, छऊ और पाइका नृत्य तथा प्रकृति-निष्ठ जीवनशैली पूरे भारत के लिए प्रेरक मॉडल हैं।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि उत्तराखंड और झारखंड के वे लोग, जिन्होंने ओडिशा को अपना दूसरा घर बनाया है, वे “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना के सशक्त वाहक हैं।


ओडिशा—विविधता में एकता का उज्ज्वल उदाहरण

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा विविधता और एकता का प्रतीक है—
कलींग युद्ध से उपजी शांति की विरासत, भगवान जगन्नाथ का आध्यात्मिक संदेश, कोणार्क की स्थापत्य महिमा, तथा आदिवासी एवं लोक संस्कृति—सभी मिलकर ओडिशा की पहचान को समृद्ध बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि ओडिशावासी सदैव “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से सभी का स्वागत करते आए हैं।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विशेष आयोजन

कार्यक्रम में—

  • उत्तराखंड और झारखंड के पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किए गए।
  • ओडिशा सरकार के ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग तथा अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा ओडिशा के लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए।
  • भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई।
  • उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का वीडियो संदेश भी播放 किया गया।

शुरुआत में राज्यपाल के आयुक्त एवं सचिव श्रीमती रूपा रोशन साहू ने स्वागत भाषण दिया।

दिल्ली में 10 नवम्बर को हुए आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।

माननीय राज्यपाल की धर्मपत्नी डॉ. जयश्री कम्भमपति सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहे।

(PNS)

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