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COP30 में आग लगने से वार्ताएँ ठप, निर्णायक मोड़ पर अटकी वैश्विक जलवायु बातचीत

PNS Bureau:-

ब्राज़ील के बेलेम में हुई घटना से 190+ देशों की बातचीत बाधित; जीवाश्म ईंधन, वित्त और न्यायसंगत संक्रमण पर टकराव चरम पर

ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित COP30 जलवायु शिखर सम्मेलन में गुरुवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब सम्मेलन स्थल पर आग लगने के बाद आपातकालीन निकासी करानी पड़ी। शुक्रवार को सम्मेलन के समापन से एक दिन पहले हुई इस घटना ने वार्ताओं को वहीं रोक दिया—एक ऐसे समय पर जब देश जीवाश्म ईंधन और जलवायु वित्त जैसे सबसे कठिन मुद्दों पर टकराव में फंसे हुए हैं।

COP30 को वह मंच माना जा रहा है जहाँ दशकों पुराने जलवायु वादों को वास्तविक कार्रवाई में बदलने की दिशा तय होगी।


COP30 की मुख्य बहसें: दुनिया आगे कैसे बढ़े?

वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है और जलवायु आपदाएँ तेज़ हो रही हैं। ऐसे में बातचीत तीन बड़ी चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है:


1. देश जलवायु कार्रवाई को कैसे तेज़ करें?

• राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)

देश हर पाँच साल में अपनी जलवायु योजनाओं को अपडेट करते हैं। COP30 में इन योजनाओं को अधिक महत्वाकांक्षी और तेज़ बनाने पर विचार जारी है।

• जीवाश्म ईंधनों से बाहर निकलना

COP28 ने “फॉसिल फ्यूल से संक्रमण” पर सहमति दी थी। COP30 में इस संक्रमण का स्पष्ट, संदर्भ-आधारित रोडमैप तय करने पर बहस है।

• राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाएँ (NAPs)

अब तक 72 देश अपनी योजनाएँ जमा कर चुके हैं, परंतु अधिकांश के पास फंड की भारी कमी है। एक प्रस्ताव—2025 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करना।

• वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य

दुनिया भर में अनुकूलन प्रगति को ट्रैक करने के लिए लगभग 100 संकेतकों पर बातचीत जारी है।

• वन वित्त रोडमैप

36 देशों का समर्थन। लक्ष्य—ट्रॉपिकल जंगलों की सुरक्षा और पुनर्स्थापना के लिए प्रतिवर्ष $66.8 बिलियन की कमी को पूरा करना।


2. पैसा और तकनीक उन तक कैसे पहुँचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है?

राजनीतिक वादे पर्याप्त नहीं—वास्तविक संसाधन जरूरी हैं।

• पेरिस समझौते का अनुच्छेद 9.1

विकसित देशों को विकासशील देशों की वित्तीय सहायता करनी चाहिए। अब एक एक्शन प्लान और जवाबदेही तंत्र पर चर्चा हो रही है।

• बाकू-टु-बेलेम $1.3 ट्रिलियन रोडमैप

प्रस्ताव—विकासशील देशों के लिए प्रति वर्ष $1.3 ट्रिलियन का वित्त जुटाना।

• लॉस एंड डैमेज फंड

COP27 में बनाया गया और COP28 में लॉन्च। लेकिन COP30 में यह अपर्याप्त फंडिंग के साथ पहुँचा है।

• ग्रीन क्लाइमेट फंड

दुनिया का सबसे बड़ा जलवायु फंड—लेकिन इसकी हालिया पुनःपूर्ति निराशाजनक रही।

• प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम

जलवायु तकनीक तक पहुँच सुधारने का प्रयास, लेकिन व्यापार और वित्तीय रुकावटों पर सदस्य देशों में मतभेद।

• जलवायु-संबंधी व्यापार प्रतिबंध

कई विकासशील देशों को नुकसान। एक प्रस्ताव—ऐसे उपायों के प्रभाव का आकलन करने के लिए प्लेटफ़ॉर्म बनाना।


3. जलवायु कार्रवाई को न्यायसंगत और समावेशी कैसे बनाया जाए?

बड़े बदलाव यदि कमजोर समुदायों की रक्षा नहीं करते, तो वे असमानता बढ़ा सकते हैं।

• जस्ट ट्रांज़िशन वर्क प्रोग्राम

सामाजिक न्याय, सम्मानजनक रोजगार और सतत विकास को प्राथमिकता। COP30 से एक व्यावहारिक ढांचा की उम्मीद।

• जेंडर एक्शन प्लान

जलवायु कार्रवाई में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने की रणनीति। नया, अद्यतन संस्करण COP30 में पेश होगा।


बेलेम का महत्व: दुनिया की जलवायु दिशा यहीं तय होगी

COP30 की वार्ताएँ यह निर्धारित करेंगी कि:

  • पेरिस समझौता कागज़ से जमीन पर कैसे उतरेगा
  • उत्सर्जन कटौती कितनी तेज़ होगी
  • क्या जलवायु न्याय वास्तव में हासिल होगा
  • क्या स्वदेशी समुदायों, अफ्रीका और विकासशील देशों को न्याय मिलेगा

अंदरूनी माहौल साफ़ है—समय कम है और समझौते में अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं।(PNS)

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