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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया “शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय” का लोकार्पण — छत्तीसगढ़ की वीरता, साहस और बलिदान को दी श्रद्धांजलि

PNS Bureau:- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ में “शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय” का शुभारंभ किया। यह संग्रहालय भारत के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष को समर्पित है — विशेष रूप से महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह को, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए।

PM inaugurates and lays the foundation stone for developmental and transformative projects worth over ?14,260 crore at Nava Raipur, in Chhattisgarh on November 01, 2025.

उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने संग्रहालय के विभिन्न दीर्घाओं का अवलोकन किया, जहाँ छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों के औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध वीरतापूर्ण संघर्षों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने इस परियोजना को उत्कृष्टता के साथ साकार करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को बधाई दी और कहा कि “यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के वीर योद्धाओं के योगदान को उजागर करता है तथा आने वाली पीढ़ियों को उनके अदम्य साहस और देशभक्ति से प्रेरित करेगा।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह स्मारक-संग्रहालय छत्तीसगढ़ की गौरवशाली जनजातीय परंपरा, साहस और बलिदान का प्रतीक है और इसे राज्य की जनता को समर्पित किया गया है। यह संग्रहालय हमारे पूर्वजों की गाथाओं को सहेजते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाएगा।

प्रधानमंत्री को इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने संग्रहालय की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ₹50 करोड़ की लागत से निर्मित इस संग्रहालय में 14 दीर्घाओं में लगभग 650 मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल इंस्टॉलेशन के माध्यम से आगंतुकों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनजातीय आंदोलनों की जानकारी सुलभ कराई गई है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया, “आदि शौर्य” नामक ई-बुकलेट का विमोचन किया तथा शहीद वीर नारायण सिंह के वंशजों से संवाद कर उनके कुशलक्षेम की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत संग्रहालय परिसर में एक पौधा भी रोपा।

कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम, राज्य के जनजातीय, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, केन्द्रीय राज्य मंत्री (जनजातीय कार्य) श्री दुर्गादास उईके, केन्द्रीय सचिव (जनजातीय कार्य) श्रीमती रंजन चोपड़ा, प्रमुख सचिव (जनजातीय कल्याण) श्री सोनमणि बोरा, निदेशक (जनजातीय कार्य मंत्रालय) श्रीमती दीपाली मसीरकर, आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, निदेशक (TRTI) श्रीमती हिना अनीमेश नेताम, शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज और जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

संग्रहालय की मुख्य विशेषताएँ:

  • प्रवेश दीर्घा: छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता, बलिदान और संस्कृति को समर्पित।
  • प्रारंभिक दीर्घाएँ: जनजातीय जीवनशैली और मराठा व ब्रिटिश उत्पीड़न से हुए विघटन का चित्रण।
  • स्वतंत्रता संघर्ष दीर्घा: हल्बा क्रांति, सरगुजा क्रांति, भूपालपट्टनम क्रांति, परलकोट क्रांति, तरापुर, मेरिया, कोई, लिंगगिरि, मुरिया और भुमकाल क्रांति जैसे प्रमुख जनआंदोलनों का प्रदर्शन।
  • महिला प्रतिरोध दीर्घा: 1878 की रानी चो-रिस क्रांति को दर्शाती है — महिलाओं के नेतृत्व वाला ऐतिहासिक आंदोलन।
  • शहीद वीर नारायण सिंह और 1857 का संग्राम: ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध उनके विद्रोह और शहादत की कथा।
  • गांधी आंदोलन में जनजातीय भागीदारी: झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह का दस्तावेजीकरण।
  • स्मारक क्षेत्र: वीर नारायण सिंह को समर्पित श्रद्धांजलि स्थल — जो जनजातीय प्रतिरोध की पराकाष्ठा का प्रतीक है।

यह संग्रहालय भारत के जनजातीय स्वाभिमान, बलिदान और गौरव की अमर गाथा को संजोते हुए राष्ट्र के लिए प्रेरणा का एक जीवंत केंद्र बनेगा।(PNS)

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