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विलुप्ति से वापसी तक: वैज्ञानिक ‘बैक-ब्रीडिंग’ से फ्लोरिआना जायंट टॉरटॉइज़ का ऐतिहासिक पुनर्स्थापन

180 साल बाद घर वापसी: फ्लोरिआना द्वीप पर फिर गूंजे विशाल कछुओं के कदम

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गैलापागोस द्वीपसमूह के फ्लोरिआना द्वीप पर 180 वर्षों के अंतराल के बाद फिर से विशाल कछुओं (जायंट टॉरटॉइज़) की वापसी हुई है। यह ऐतिहासिक कदम प्रशांत महासागर के इस अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र में अब तक की सबसे बड़ी पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

विलुप्ति से पुनर्जन्म तक की कहानी

फ्लोरिआना जायंट टॉरटॉइज़ (Chelonoidis niger niger) 19वीं सदी के मध्य में व्हेल शिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में पकड़ लिए जाने के कारण 1840 के दशक में विलुप्त हो गए थे। उस समय जहाज़ों पर इन्हें जीवित “भोजन भंडार” के रूप में रखा जाता था।

विडंबना यह रही कि कुछ कछुओं को नाविकों ने अन्य द्वीपों पर छोड़ दिया या समुद्र में फेंक दिया, जिससे उनकी आनुवंशिक विरासत बची रही। 2008 में इसाबेला द्वीप के वुल्फ ज्वालामुखी क्षेत्र में मिले कछुओं में फ्लोरिआना वंश के जीन पाए गए।

वैज्ञानिक “बैक-ब्रीडिंग” से पुनर्सृजन

2017 में एक विशेष कैप्टिव “बैक-ब्रीडिंग” कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें 23 ऐसे संकर (हाइब्रिड) कछुओं को चुना गया जो आनुवंशिक रूप से फ्लोरिआना उपप्रजाति के सबसे निकट थे।

  • 2025 तक 600 से अधिक शावकों का जन्म हुआ।
  • इनमें से सैकड़ों को उनके पैतृक द्वीप फ्लोरिआना में पुनः छोड़ा गया।
  • नर कछुए लगभग 1.5 मीटर (5 फीट) तक लंबे हो सकते हैं।

पारिस्थितिकी के “की-स्टोन” इंजीनियर

विशाल कछुए केवल एक प्रजाति नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के “की-स्टोन स्पीशीज़” हैं।

  • ये चराई कर खुले आवास बनाए रखते हैं।
  • बीजों का व्यापक प्रसार करते हैं।
  • अपनी गतिविधियों से सूक्ष्म आवास (माइक्रो-हैबिटैट) तैयार करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इनके लौटने से जैव विविधता की बहाली को नई गति मिलेगी।

फ्लोरिआना: संकट और उम्मीद का द्वीप

फ्लोरिआना, गैलापागोस का छठा सबसे बड़ा द्वीप, कभी स्थानिक (एंडेमिक) प्रजातियों से समृद्ध था — जैसे फ्लोरिआना मॉकिंगबर्ड और फ्लोरिआना रेसर साँप। लेकिन नाविकों और बसने वालों के साथ आए चूहों और जंगली बिल्लियों ने स्थानीय जीव-जंतुओं को भारी नुकसान पहुंचाया।

2023 में शुरू हुए आक्रामक प्रजाति उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अधिकांश चूहों और जंगली बिल्लियों को हटाया गया, जिससे पुनर्स्थापन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

  • गैलापागोस रेल पक्षी फिर से दर्ज किया गया।
  • ग्राउंड फिंच, देशी छिपकलियों और घोंघों की संख्या में वृद्धि देखी गई।
  • किसानों ने बेहतर फसल उत्पादन की सूचना दी है।

सामुदायिक सहभागिता से सफलता

यह पहल फ्लोरिआना इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट के तहत संचालित हुई, जिसमें गैलापागोस नेशनल पार्क निदेशालय, कई संरक्षण संस्थाएँ और द्वीप के लगभग 160 निवासी सक्रिय रूप से जुड़े हैं।

स्थानीय प्रतिनिधि वेरोनिका मोरा ने कहा कि यह संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच संतुलन की दिशा में बड़ा कदम है, क्योंकि पर्यटन, कृषि और मत्स्य पालन पूरी तरह द्वीप के स्वास्थ्य पर निर्भर हैं।

आगे की योजना

अगले चरण में फ्लोरिआना मॉकिंगबर्ड, फ्लोरिआना रेसर साँप, वेजिटेरियन फिंच और लिटिल वर्मिलियन फ्लाईकैचर जैसी अन्य स्थानिक प्रजातियों की वापसी की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास न केवल एक प्रजाति की वापसी है, बल्कि एक पूरे पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्जागरण की शुरुआत है।

फ्लोरिआना के कछुओं की यह घर वापसी प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल बन गई है — यह साबित करती है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामुदायिक सहभागिता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से खोई हुई विरासत भी वापस लाई जा सकती है। (PNS)

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