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वैज्ञानिकों ने दर्ज की अब तक की सबसे शक्तिशाली ब्लैक होल फ्लेयर — 10 ट्रिलियन सूर्यों से भी अधिक चमकी

PNS Bureau | 6 NOV 2025: वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक खोज में अब तक की सबसे ऊर्जावान फ्लेयर (flare) का अवलोकन किया है, जो एक अतिविशाल ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) से निकली थी और जिसने कुछ समय के लिए 10 ट्रिलियन सूर्यों जितनी रोशनी बिखेरी।

यह शोध ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ (Nature Astronomy) जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसका नेतृत्व कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) के खगोलशास्त्री डॉ. मैथ्यू ग्राहम ने किया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अद्भुत विस्फोट तब हुआ जब एक असाधारण रूप से बड़ा तारा ब्लैक होल के बहुत करीब चला गया, जिसके बाद उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से वह खिंचकर टुकड़े-टुकड़े हो गया — जिसे वैज्ञानिक भाषा में “स्पेगेटीफिकेशन” (spaghettification) कहा जाता है।

“तारा ब्लैक होल के इतना करीब आ गया कि वह लम्बा और पतला होकर खिंच गया और अंततः उसमें समा गया,” अध्ययन की सह-लेखिका डॉ. के.ई. सैविक फोर्ड ने बताया। “उसके बाद वह पदार्थ ब्लैक होल के चारों ओर घूमता हुआ भीतर चला गया, जिससे इतनी विशाल ऊर्जा उत्पन्न हुई।”

यह सुपरमैसिव ब्लैक होल, जो सूर्य से लगभग 30 करोड़ गुना अधिक विशाल है, पृथ्वी से लगभग 11 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक आकाशगंगा में स्थित है। संबंधित तारे का द्रव्यमान सूर्य से 30 से 200 गुना अधिक अनुमानित किया गया है। वह तारा टूटकर गैस की एक धार में बदल गया, जो अत्यधिक गर्म होकर तेज चमकने लगी।

इस घटना को सबसे पहले 2018 में कैलटेक के पेलोमर वेधशाला (Palomar Observatory) ने देखा था। यह फ्लेयर लगभग तीन महीनों में अपने चरम पर पहुँची, और अब तक दर्ज किसी भी समान घटना से 30 गुना अधिक चमकीली रही। वर्तमान में यह घटना जारी है, लेकिन धीरे-धीरे मंद पड़ रही है, और अनुमान है कि पूरा प्रक्रिया लगभग 11 वर्षों तक चलेगी।

वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग हर बड़ी आकाशगंगा — जिसमें हमारी मिल्की वे भी शामिल है — के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है, लेकिन इनका निर्माण कैसे हुआ, यह अब भी एक रहस्य है।

यह खोज ब्रह्मांड के प्रारंभिक युग की एक दुर्लभ झलक प्रदान करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी दूरस्थ घटनाओं का अध्ययन करने से उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि ब्लैक होल कैसे विकसित होते हैं और वे अपनी आकाशगंगाओं को कैसे प्रभावित करते हैं।

डॉ. ग्राहम ने कहा, “ऐसे विशाल और दूरस्थ ब्लैक होल का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि उन्होंने आज के ब्रह्मांड को किस तरह आकार दिया।”

(PNS)

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