पीडीयूएनएएसएस में क्षेत्रीय श्रम आयुक्तों (केंद्रीय) के लिए ‘रिकवरी मैनेजमेंट’ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण में देशभर के 26 क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) भाग ले रहे हैं

PNS,नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS), नई दिल्ली में क्षेत्रीय श्रम आयुक्तों (केंद्रीय) के लिए ‘रिकवरी मैनेजमेंट’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से 26 क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) भाग ले रहे हैं।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रम प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा तंत्र में कार्यरत अधिकारियों की पेशेवर दक्षता को सुदृढ़ बनाने तथा विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ईपीएफओ की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था के रूप में स्थापित पीडीयूएनएएसएस अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत अन्य संस्थानों के साथ भी क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय सहयोग कर रही है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित, एसीसी, पीडीयूएनएएसएस फरीदाबाद परिसर श्री अमित वशिष्ठ तथा आरपीएफसी-I श्री सौरभ सुमन प्रसाद उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का संचालन आरपीएफसी-I एवं मुख्य शिक्षण अधिकारी श्री रिजवान उद्दीन द्वारा पाठ्यक्रम निदेशक तथा आरपीएफसी-II श्री धीरेंद्र मीणा द्वारा उप-पाठ्यक्रम निदेशक के रूप में किया जा रहा है।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए निदेशक श्री कुमार रोहित ने कहा कि रिकवरी मैनेजमेंट केवल वैधानिक प्रावधानों को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों में कानूनी ढांचे, प्रक्रियागत निष्पक्षता, प्रशासनिक विवेक और पेशेवर ईमानदारी की गहरी समझ होना आवश्यक है।
उन्होंने संवादात्मक सत्र के दौरान प्रतिभागियों से रिकवरी प्रक्रिया की वर्तमान व्यवस्था पर चर्चा की, जिसमें बताया गया कि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा जारी रिकवरी प्रमाणपत्रों का निष्पादन जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से किया जाता है।
श्री रोहित ने कहा कि रिकवरी अधिकारी ऐसे लोगों से भी संवाद करते हैं जो विभिन्न आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का सामना कर रहे होते हैं। ऐसे में कानून का सख्ती से पालन करने के साथ-साथ प्रभावी संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मक व्यवहार भी स्वैच्छिक अनुपालन सुनिश्चित करने तथा नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार कानूनी विशेषज्ञता और व्यवहारिक कौशल का संतुलित उपयोग न केवल रिकवरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाता है, बल्कि सरकारी संस्थानों के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में ऐसे लोक सेवकों की आवश्यकता है जो कानूनी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ पेशेवर और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएं। इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम अधिकारियों में इन गुणों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को रिकवरी कार्यवाही से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों, व्यावहारिक चुनौतियों, केस स्टडी और उभरती हुई सर्वोत्तम प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे अपने दायित्वों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
यह कार्यक्रम पीडीयूएनएएसएस को श्रम प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में क्षमता निर्माण, संस्थागत सहयोग तथा ज्ञान साझेदारी के एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में और अधिक सुदृढ़ करता है। ऐसे प्रयासों के माध्यम से अकादमी कुशल, भविष्य के लिए तैयार और नागरिक-केंद्रित लोक सेवा तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
पीडीयूएनएएसएस के बारे में
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था है। वर्ष 1990 में स्थापित यह अकादमी सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श सेवाएं प्रदान करती है तथा श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थानों के सहयोग से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का विस्तार कर रही है।




