
92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित, ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान; 2026-27 के लिए ₹12,200 करोड़ का प्रावधान
PNS,नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026।
खेती प्रकृति पर निर्भर है और मौसम की एक करवट किसान की महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी ओलावृष्टि तो कभी बेमौसम बारिश—ऐसे जोखिमों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर उभरी है।
2016 में शुरू हुई इस योजना ने पिछले एक दशक में देश के करोड़ों किसानों को फसल नुकसान के जोखिम से बचाने में अहम भूमिका निभाई है। खरीफ 2016 से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए जा चुके हैं, जबकि 26.33 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों के दावों का भुगतान ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक रहा है।
₹12,200 करोड़ का प्रावधान, किसानों की फसल को व्यापक सुरक्षा
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में PMFBY के लिए ₹12,200 करोड़ का प्रावधान किया है। योजना का उद्देश्य केवल फसल नुकसान के बाद मुआवजा देना नहीं, बल्कि किसानों की आय को स्थिर करना, उनकी आजीविका को सुरक्षित रखना और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों के बीच कृषि को अधिक लचीला बनाना है।
योजना के तहत सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, बिजली गिरना, कीट एवं रोग, जलभराव, बेमौसम बारिश जैसी प्राकृतिक एवं जलवायु संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान को निर्धारित शर्तों के तहत कवर किया जाता है।
किसान की जेब पर कम बोझ, सुरक्षा का दायरा बड़ा
PMFBY की खासियत इसका किफायती प्रीमियम है।
- खरीफ खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए अधिकतम 2%
- रबी खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए अधिकतम 1.5%
- वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5%
शेष प्रीमियम का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाता है। उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र और राज्य के बीच सब्सिडी हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में है।
फसल बोने से लेकर कटाई के बाद तक सुरक्षा
PMFBY केवल खड़ी फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है। योजना के तहत फसल चक्र के अलग-अलग चरणों में जोखिमों को कवर किया जाता है।
बोआई से पहले: प्रतिकूल मौसम के कारण बोआई नहीं हो पाने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के तहत दावा उपलब्ध है।
खड़ी फसल: सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, बिजली गिरना, कीट और रोग जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है।
स्थानीय आपदा: ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटना और प्राकृतिक आग जैसी घटनाओं से व्यक्तिगत खेत स्तर पर हुए नुकसान को निर्धारित प्रावधानों के तहत कवर किया जाता है।
कटाई के बाद: खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक कुछ निर्दिष्ट चक्रवाती एवं बेमौसम बारिश की घटनाओं से होने वाले नुकसान के लिए सुरक्षा दी जाती है।
सिर्फ आंकड़े नहीं, किसान की जिंदगी में बदलाव की कहानी
PMFBY की उपयोगिता को असम के नगांव जिले के चनखला गांव के छोटे किसान अनवर हुसैन की कहानी से समझा जा सकता है।
भारी बारिश से उनकी फसल बर्बाद हो गई। परिवार की आजीविका के साथ-साथ उनके सामने कर्ज चुकाने और अगली फसल के लिए निवेश जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई।
अनवर ने PMFBY के तहत महज ₹100 का प्रीमियम देकर अपनी फसल का बीमा कराया था। फसल नुकसान के आकलन के बाद उन्हें ₹50,600 का मुआवजा मिला।
इस सहायता से वे नुकसान से उबरने, कर्ज का एक हिस्सा चुकाने और अगली फसल के लिए जरूरी कृषि इनपुट खरीदने में सक्षम हुए। उनके लिए फसल बीमा सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि संकट के समय आर्थिक सहारा साबित हुआ।
2026 के खरीफ सीजन में भी बढ़ा कवरेज
PMFBY के तहत खरीफ 2026 में 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में योजना लागू है।
27 अगस्त 2026 तक 241.38 लाख किसान बीमित हो चुके थे और 278.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को फसल बीमा के दायरे में लाया जा चुका था। यह खरीफ 2025 के मुकाबले किसानों और बीमित क्षेत्र—दोनों के स्तर पर अधिक है।
वहीं, खरीफ 2025 के लिए ₹9,837.61 करोड़ के दावों का भुगतान 60.89 लाख पात्र किसानों को किया जा चुका है।
यूपी समेत कई राज्यों में किसानों का बढ़ा भरोसा
PMFBY में कई बड़े कृषि राज्यों की भागीदारी लगातार मजबूत हुई है।
PIB के अनुसार, खरीफ 2025 में उत्तर प्रदेश में बीमित किसानों की संख्या में 35% की वृद्धि हुई और यह 15.48 लाख से बढ़कर 20.84 लाख हो गई।
इसी तरह हरियाणा में 20%, राजस्थान में 19%, मध्य प्रदेश में 12%, छत्तीसगढ़ में 9% और ओडिशा में 5% की वृद्धि दर्ज की गई।
आंध्र प्रदेश ने खरीफ 2022 से और झारखंड ने खरीफ 2024 से योजना में वापसी की। पश्चिम बंगाल खरीफ 2026 से फिर PMFBY में शामिल हुआ है, जबकि बिहार रबी 2026-27 से योजना को लागू करने की तैयारी में है।
अब टेक्नोलॉजी भी बनेगी किसान की ताकत
PMFBY को केवल बीमा योजना नहीं, बल्कि एक बड़े डिजिटल कृषि-जोखिम प्रबंधन तंत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
YES-TECH से फसल उपज का तकनीकी आकलन
YES-TECH (Yield Estimation System Based on Technology) में रिमोट सेंसिंग और तकनीक आधारित तरीकों से फसल की उपज का अधिक सटीक आकलन किया जाता है। इसे खरीफ 2023 में धान और गेहूं तथा खरीफ 2024 में सोयाबीन के लिए शुरू किया गया था।
WINDS से मौसम की स्थानीय जानकारी
WINDS (Weather Information Network and Data System) के जरिए ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्वचालित मौसम स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज से स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
डिजिटल तरीके से फसल नुकसान का आकलन
CROPIC में जियो-टैग्ड तस्वीरों के जरिए फसल की स्थिति का आकलन किया जाता है, जबकि CLAP (Crop Loss Assessment App) स्थानीय आपदाओं से हुए नुकसान को डिजिटल तरीके से दर्ज करने में मदद करता है।
दावे और शिकायतें भी डिजिटल
DigiClaim के जरिए दावों की गणना और निपटान को डिजिटल बनाया गया है। PIB के अनुसार, इसकी शुरुआत से अब तक ₹55,000 करोड़ से अधिक के दावों की गणना और भुगतान डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा चुका है।
किसानों की शिकायतों और सहायता के लिए कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन 14447 भी उपलब्ध है। जनवरी 2024 से अब तक 26.12 लाख किसान शिकायतों का समाधान किया जा चुका है और समाधान दर 99.66% रही है।
किरायेदार और बटाईदार किसान भी दायरे में
PMFBY के तहत पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले किरायेदार किसान और बटाईदार किसान भी फसल बीमा का लाभ ले सकते हैं।
2018 से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे 1.44 करोड़ से अधिक किसानों का नामांकन किया जा चुका है।
आगे की राह: जलवायु जोखिमों के बीच मजबूत कृषि सुरक्षा
बदलते मौसम और बढ़ती जलवायु अनिश्चितता ने खेती के जोखिम को और बढ़ाया है। ऐसे समय में कम प्रीमियम पर व्यापक फसल सुरक्षा किसानों को आय के अचानक आने वाले झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
PMFBY में डिजिटल तकनीक, रिमोट सेंसिंग, मौसम संबंधी डेटा, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और ऑनलाइन दावा निपटान को जोड़ने से फसल बीमा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
यानी किसान के लिए संदेश साफ है—मौसम का जोखिम भले उसके हाथ में न हो, लेकिन उस जोखिम से होने वाले आर्थिक नुकसान के खिलाफ सुरक्षा का विकल्प उसके पास है।




