ब्रेकिंग
चमेली ओड़ा को न्याय दिलाने की मांग पर 17 जून को केंद्रापाड़ा जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेगा यु... विश्व पर्यावरण दिवस पर IWWA ओडिशा सेंटर का वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का बड़ा फैसला: चावल मिलिंग शुल्क दोगुना, किसानों से धान खरीद होगी और सुचार... ओडिशा और जापान के तोत्तोरी प्रांत के बीच मैत्री समझौते पर चर्चा, आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को मिले... नीट (यूजी) 2026 पुनर्परीक्षा की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, जिलाधिकारियों को दिए आवश्यक न... इजरायली स्टार्टअप ‘शिफ्टर्स’ ने जुटाए 1.02 करोड़ डॉलर, एआई-संचालित स्वायत्त रोबोटिक टीमों के विकास क... ईएसआईसी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस, बीडीएस और बी.एससी. नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश ... अफ्रीका में इबोला से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफो... जापानी फ्रूट सैंडो बना रहा है गर्मियों को खास, स्वाद के साथ कला का अनोखा संगम कैंसर केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी: मरीजों और देखभालकर्ताओं के लिए व्यापक सहयोग ...
बिहार

बिहार चुनाव 2025: बदलाव की लहर, जनता ने दिया जोशभरा जनादेश – माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य

PNS Bureau , 9 November:
मार्क्सवादी लेनिनवादी (माले) पार्टी के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने स्पष्ट रूप से बदलाव का संदेश दिया है। गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी, 200 यूनिट फ्री बिजली, महिलाओं को कर्ज से मुक्ति, किसानों को सुरक्षा और कानून के राज को सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर केंद्रित होकर माले ने चुनाव प्रचार चलाया।

उन्होंने बताया कि 22 अक्टूबर से 6 नवंबर तक पार्टी ने राज्य भर में 50 से अधिक जनसभाएं कीं। “हमने राजगीर से अभियान की शुरुआत की और पिपरा में इसका समापन किया। 20 सीटों में से दो नई सीटें मिलीं। जनता, खासकर युवाओं से जबरदस्त समर्थन मिला। महिलाओं में सरकार के खिलाफ गहरा गुस्सा दिखा और कार्यकर्ताओं ने एक-एक वोट के लिए संघर्ष किया,” उन्होंने कहा।

दीपंकर ने कहा कि पहले चरण में 65.08 प्रतिशत मतदान बिहार के लिए ऐतिहासिक रहा। “यह आंकड़ा दिखाता है कि जनता सरकार बदलने के मूड में है। सत्ता-विरोधी लहर साफ है। जब जनता बदलाव चाहती है, तो वह वोटों में झलकता है।”

उन्होंने कहा कि इस बार वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का एक कारण यह भी रहा कि लोगों में अपने वोट की रक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। “एसआईआर की कार्रवाई से लोगों में वोट छीनने की साजिश के खिलाफ चेतना बढ़ी। गरीबों, प्रवासियों और मुस्लिम समुदाय में मतदान को लेकर काफी उत्साह रहा। हालांकि कई प्रवासियों के नाम वोटर लिस्ट से गायब पाए गए।”

दीपंकर ने बताया कि 47 लाख वोटर कम होने की वजह से कुल वोट प्रतिशत में वृद्धि का भ्रम बना है। उन्होंने कहा कि “फर्जी वोटिंग का जनता ने डटकर मुकाबला किया, इसी कारण कई जगह तनाव और हमले हुए।”

एनडीए नेताओं की भाषा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य नेताओं ने धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। ‘बिजली काट देंगे’, ‘घर से निकलने नहीं देंगे’ जैसी बातें विकास की भाषा नहीं हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”

उन्होंने कहा कि “बिहार का यह चुनाव दिखाता है कि जनता अब पूरी तरह जाग चुकी है और यह जनादेश पूरे देश में बदलाव की बयार लाएगा।”

माले नेता मीना तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए 10 हजार रुपये के लाभ का कोई विशेष असर नहीं दिखा। “महिलाओं में 20 साल की सरकार के खिलाफ गुस्सा चरम पर था। सर्वे में सिर्फ 20-25% महिलाओं ने कहा कि उन्हें यह राशि मिली, वह भी भारी अनियमितताओं के साथ।”

उन्होंने कहा कि “बिहार में महिलाओं ने कर्ज के खिलाफ मजबूत आंदोलन किया था, इसलिए यह नारा उभरा — ‘दस हजार में दम नहीं, कर्ज माफी से कम नहीं!’ यही चुनाव का बड़ा मुद्दा बना।”

दीघा सीट से माले प्रत्याशी दिव्या गौतम ने कहा कि युवाओं ने इस बार परिवर्तन के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। “बिहार की जनता अब पूरी तरह बदलाव चाहती है और यह चुनाव उसी दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा,” उन्होंने कहा।


🔖 मुख्य बिंदु:

  • माले ने 22 अक्टूबर से 6 नवंबर तक 50+ सभाएं कीं
  • 65.08% मतदान को दीपंकर ने बताया “बदलाव की लहर” का संकेत
  • महिलाओं और युवाओं ने दिखाया जबरदस्त उत्साह
  • “दस हजार में दम नहीं, कर्ज माफी से कम नहीं” बना चुनावी नारा
  • एनडीए नेताओं की भाषा को बताया “धमकी भरी और खतरनाक”(PNS)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button