
श्रीलंका पहुँचे भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष, पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत
गंगारामाय मंदिर, कोलंबो में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन | भारत–श्रीलंका के गहरे सभ्यतागत व आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक
कोलंबो/नई दिल्ली |
05 फरवरी 2026
भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका पहुँच गए हैं। इन अवशेषों का आगमन
भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत पर आधारित गहरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और
सभ्यतागत संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करता है।
पवित्र अवशेषों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीलंका लाया गया और
भारत–श्रीलंका प्रोटोकॉल के अनुसार इन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान प्रदान किया गया।
अवशेषों के साथ गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत के नेतृत्व में
उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल तथा गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष सांघवी
उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी एवं अन्य गणमान्य भी शामिल थे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- देवनीमोरी अवशेषों की श्रीलंका में पहली बार सार्वजनिक वंदना
- गंगारामाय मंदिर, कोलंबो में 04 फरवरी 2026 को उद्घाटन
- 05 फरवरी 2026 से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन/वंदना हेतु खुला
- श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के साथ अवशेषों का आगमन—विशेष महत्व
यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2025 में श्रीलंका की
राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की गई है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने
अनुराधापुरा में “सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स” परियोजना के विकास हेतु
अनुदान सहायता की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त 2020 में बौद्ध संबंधों के संवर्धन हेतु
घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता का भी उल्लेख किया गया था।
पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 04 फरवरी 2026 को कोलंबो स्थित प्रतिष्ठित
गंगारामाय मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति
श्री अनुर कुमार दिसानायके ने किया।
भारतीय पक्ष से गुजरात के राज्यपाल तथा उपमुख्यमंत्री ने सहभागिता की। इस अवसर पर गंगारामाय मंदिर के
मुख्य अधिपति वें. डॉ. किरिंदे अस्साजी थेरो भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए, जिनमें
(डॉ.) हिनिदुमा सुनील सेनेवी (बुद्धशासन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्य),
(डॉ.) नलिंदा जयतिस्सा (स्वास्थ्य एवं जनसंचार) तथा
(प्रो.) ए.एच.एम.एच. अबयरथना (लोक प्रशासन, प्रांतीय परिषद एवं स्थानीय शासन) शामिल हैं।
प्रदर्शनी के साथ दो विशेष प्रदर्शनियाँ भी शुरू की गईं—
“Unearthing the Sacred Piprahwa” तथा
“Sacred Relic and Cultural Engagement of Contemporary India”।
पवित्र अवशेषों को पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ मंदिर में स्थापित किया गया है। यह प्रदर्शनी
05 फरवरी 2026 से सार्वजनिक वंदना हेतु खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका सहित
विश्वभर के श्रद्धालु भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे।
यह देवनीमोरी अवशेषों की भारत के बाहर पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है।
इससे पहले भारत ने श्रीलंका में कपिलवस्तु अवशेष (2012) तथा
सारनाथ अवशेष (2018) की प्रदर्शनी आयोजित की थी।
समापन संदेश
देवनीमोरी अवशेषों की यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश—करुणा, शांति और अहिंसा—की जीवंत अभिव्यक्ति है।
यह भारत–श्रीलंका के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-जन के संबंधों को और अधिक मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर है।
स्रोत: PIB दिल्ली | पोस्टेड ऑन: 05 फरवरी 2026




