
2023 में 1.20 लाख से अधिक मामले दर्ज, राज्यों में प्रवृत्ति चिंताजनक
नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026।
देश में नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में 1,20,010 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाते हैं। (Press Information Bureau)
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने बताया कि यह आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के “क्राइम इन इंडिया” रिपोर्ट पर आधारित हैं। (Press Information Bureau)
मुख्य तथ्य (डेटा आधारित रिपोर्ट)
- 2019: 72,721 मामले
- 2020: 59,806 मामले
- 2021: 78,331 मामले
- 2022: 1,15,236 मामले
- 2023: 1,20,010 मामले
➡️ स्पष्ट है कि 2021 के बाद मामलों में तेज उछाल दर्ज हुआ है। (Press Information Bureau)
राज्यवार विश्लेषण: कहां स्थिति ज्यादा गंभीर?
- केरल: 2023 में 30,697 मामले (सबसे अधिक)
- महाराष्ट्र: 15,610 मामले
- पंजाब: 11,589 मामले
- उत्तर प्रदेश: 9,387 मामले
- तमिलनाडु: 10,126 मामले
➡️ दक्षिण और पश्चिम भारत के कुछ राज्यों में मामलों की संख्या अत्यधिक अधिक है, जो एक क्षेत्रीय पैटर्न को दर्शाती है। (Press Information Bureau)
विश्लेषण: क्यों बढ़ रहे हैं NDPS मामले?
1. बढ़ती तस्करी और नेटवर्क
अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क अधिक सक्रिय हुए हैं, जिससे मामलों की संख्या बढ़ रही है।
2. कानून प्रवर्तन में सख्ती
विशेषज्ञों के अनुसार, मामलों में वृद्धि का एक कारण पुलिस और एजेंसियों की सक्रियता भी है—अर्थात अधिक मामलों का पंजीकरण।
3. शहरीकरण और मांग
बड़े शहरों और युवा आबादी में नशीले पदार्थों की मांग बढ़ने से भी यह प्रवृत्ति प्रभावित हो रही है।
4. सीमावर्ती राज्यों की भूमिका
पंजाब, जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती राज्यों में तस्करी की चुनौती अधिक बनी हुई है।
नीतिगत संदर्भ
- NDPS (संशोधन) अधिनियम, 2014 पूरे देश में लागू है
- इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों के नियंत्रण और सख्त दंड व्यवस्था सुनिश्चित करना है (Press Information Bureau)
व्यापक प्रभाव
- सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर
- युवाओं में नशे की लत का खतरा
- कानून-व्यवस्था पर दबाव
- सामाजिक-आर्थिक लागत में वृद्धि
निष्कर्ष
NDPS मामलों में वृद्धि केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती भी है। सरकार की सख्ती के बावजूद, इस समस्या से निपटने के लिए बहु-आयामी रणनीति—जागरूकता, पुनर्वास और अंतर-एजेंसी समन्वय—की आवश्यकता है।
(PNS Bureau)




