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जनजातीय छात्रों की शिक्षा में तकनीकी क्रांति: राज्यपाल ने स्मार्ट क्लासरूम के प्रभाव मूल्यांकन की आवश्यकता जताई

PNS Bureau, 25 नवंबर:
अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के तहत संचालित स्कूलों में स्थापित स्मार्ट क्लासरूम बोर्डों के प्रभाव का मूल्यांकन करने पर राज्यपाल ने विशेष जोर दिया। राजभवन के न्यू अभिषेक हॉल में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यपाल ने आज मलकानगिरी, कंधमाल, कोरापुट, सुंदरगढ़, मयूरभंज, रायगड़ा और नबरंगपुर—इन 7 जनजाति बहुल जिलों के छात्रों, शिक्षकों, जिलाधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों से संवाद किया।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत इन जिलों के 46 SSD स्कूलों में स्मार्ट इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए गए हैं।


🔹 “प्रभाव मूल्यांकन से शिक्षा में तकनीकी बदलाव को मिलेगा प्रोत्साहन” – राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि

“स्मार्ट क्लासरूम के प्रभाव का मूल्यांकन करने से तकनीकी-सक्षम शिक्षा के लाभ सामने आएंगे और अधिक संस्थाओं को इस दिशा में सहयोग के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।”


📚 छात्रों और शिक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया

  • छात्रों ने बताया कि डिजिटल कक्षाएं पढ़ाई को अधिक समझने योग्य और रुचिकर बनाती हैं।
  • शिक्षकों ने साझा किया कि स्मार्ट बोर्ड से छात्रों की सहभागिता, सीखने के परिणाम और विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों में रूचि बढ़ी है।

🌟 तकनीक से बदलेगा जनजातीय बच्चों का भविष्य

राज्यपाल ने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम न केवल शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि सीखने की क्षमता और जिज्ञासा को भी विकसित करते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय लड़कियों में साक्षरता स्तर बढ़ाने हेतु लक्षित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।


🤝 SBI एवं विभागीय सहयोग की सराहना

राज्यपाल ने भारतीय स्टेट बैंक को इस पहल में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयासों की प्रशंसा की।


🏛 बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

  • बी. परमेश्वरन – कमिश्नर एवं सचिव, ST & SC विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
  • श्रीमती रूपा रोशन साहू – सचिव एवं राज्यपाल के कमिश्नर
  • श्री रत्न तेजा दिनकर अकेला – चीफ जनरल मैनेजर, SBI
  • राजभवन के वरिष्ठ अधिकारी

📌 निष्कर्ष

▶️ स्मार्ट क्लासरूम ने जनजातीय शिक्षा में नई दिशा दी है।
▶️ अब आवश्यक है – प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन ताकि भविष्य में इस मॉडल को और मजबूत बनाया जा सके।
▶️ तकनीक बनेगी जनजातीय बच्चों की शैक्षिक प्रगति और सशक्तिकरण की नई राह।


🖥️ “डिजिटल शिक्षा से अब दूरस्थ स्कूलों में भी गुणवत्ता आधारित सीखने की उम्मीद” (PNS)

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