ब्रिक-इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज़ (BRIC-ILS) में समुद्री जैवप्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 की शुरुआत राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ

PNS Bureau 25,Nov 25 :
ब्रिक-इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज़ (BRIC-ILS) में आयोजित समुद्री जैवप्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 एक सशक्त राष्ट्रीय संकल्प के साथ शुरू हुआ है। देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत BioE-3 (अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्यम) के माध्यम से समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी और नीली अर्थव्यवस्था में विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है।
🔬 समुद्री जैवप्रौद्योगिकी – वैश्विक सहयोग और नवाचार का मंच
यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वैज्ञानिकों को एक ही मंच पर लाकर ज्ञान-साझाकरण, शोध सहयोग और नवाचार विकास के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है।
समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी को भविष्य में उद्योग, अनुसंधान और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।
🎤 उद्घाटन सत्र की मुख्य बातें
- डॉ. देवाशीष दास, निदेशक, BRIC-ILS ने कहा कि “भारत का महासागर वैज्ञानिक खोज, समुदाय विकास और उद्योग विस्तार के लिए अपार संभावनाओं से भरा हुआ है।”
- प्रो. राजेश एस. गोखले, सचिव (DBT), ने कहा कि जैवप्रौद्योगिकी अब प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास का इंजन बन रही है।
- प्रो. एम. रविचंद्रन, सचिव (MoES), ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा हेतु वैज्ञानिक प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
- डॉ. एम. वी. रमन मूर्ति, मिशन निदेशक – Deep Ocean Mission, ने भारत के समुद्री मिशन की भूमिका स्पष्ट की।
🔗 इन सभी वक्ताओं ने DBT, MoES, केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच मजबूत सहयोग को रेखांकित किया।
🌊 समुद्री जैव अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम
प्रो. वॉल्कर सीबेहर ने मुख्य वक्तव्य में बताया कि कैसे समुद्री शैवाल अनुसंधान एवं माइक्रोबियल बायोप्रोस्पेक्टिंग के माध्यम से सतत नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
🔹 विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर शोध साझा किया:
- गहरे समुद्र के सूक्ष्मजीवों का अनुक्रमण
- महासागर विरोम और मल्टी-ओमिक्स तकनीक
- जैव-सक्रिय यौगिकों की खोज
- भविष्य की चिकित्सा विज्ञान में समुद्री संसाधनों की भूमिका
🌐 ओडिशा बनेगा वैश्विक समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी हब
सम्मेलन के दौरान ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर की घोषणा की गई, जो इस क्षेत्र में भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा।
👩🔬 दूसरी दिन का मुख्य आकर्षण
- प्रो. जॉन कोट्स ने अपने सशक्त वक्तव्य में बताया कि भारत में मौजूद समुद्री संसाधन विश्व स्तरीय उद्योगों में परिवर्तित होने की क्षमता रखते हैं।
- सत्रों में समुद्री शैवाल आधारित नवाचार, जैव उर्वरक, तटीय क्षेत्रों में रहने वाली आबादी एवं उभरते बायोटेक उद्योगों के लिए वैज्ञानिक सहयोग पर चर्चा हुई।
📌 निष्कर्ष
📍 सम्मेलन ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया:
महासागर सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि भविष्य की रोजगार, उद्योग और वैज्ञानिक उन्नति का केंद्रबिंदु हैं।
📍 समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी भारत के विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को गति देगी।
📍 बहु-ओमिक्स तकनीक और समुद्री स्वास्थ्य पर हुई चर्चाओं ने अगले दशक के लिए शोध दिशा तय की।
🌟 BRIC-ILS एवं सहायक संस्थानों का यह प्रयास भारत को नीली अर्थव्यवस्था और जैव-प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहा है। (PNS)




