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पुरी रथयात्रा दलाचकड़ा हादसा: कांग्रेस ने जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल, की न्यायिक जांच की मांग

PNS Bureau,9 November :-पुरी: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान दलाचकड़ा में हुई दर्दनाक दुर्घटना — जिसमें तीन श्रद्धालुओं की मौत और सैकड़ों के घायल होने की पुष्टि हुई थी — उस घटना पर बनी जांच समिति की रिपोर्ट जारी होने के बाद आज कांग्रेस भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

इस सम्मेलन में पूर्व मंत्री देबाशीष नायक, वरिष्ठ प्रवक्ता ललातेंदु दास और प्रवक्ता जयश्री पात्रा उपस्थित थे और उन्होंने रिपोर्ट को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।


🗣️ कांग्रेस का बयान

पूर्व मंत्री देबाशीष नायक ने कहा —
“रथयात्रा दलाचकड़ा की घटना अत्यंत दुखद है। प्रशासन ने यात्रा की निगरानी के लिए 275 CCTV लगाने का निर्णय लिया था, लेकिन वास्तविकता में मात्र 160–165 कैमरे ही लगाए गए। सवाल यह है कि इसकी जिम्मेदारी किसी उच्च अधिकारी को क्यों नहीं दी गई? तिरुपति मंदिर जैसी दर्शन व्यवस्था लागू करने की सिफारिश के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया?”

उन्होंने कहा कि सरकार को दक्षिण भारत के मंदिरों की व्यवस्था से सीख लेकर श्री जगन्नाथ मंदिर में सुधार लागू करने चाहिए


📑 “रिपोर्ट से नहीं मिला जवाब”

वरिष्ठ प्रवक्ता ललातेंदु दास ने कहा कि
“पुरी रथयात्रा दलाचकड़ा हादसे की जांच रिपोर्ट, कमिश्नर अनुग गर्ग की अध्यक्षता में आई है। लेकिन रिपोर्ट में कई प्रश्नों के उत्तर गायब हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि रथयात्रा इस बार त्रुटिरहित होगी और भक्त दिव्य अनुभव लेकर लौटेंगे, लेकिन परिणाम इसके विपरीत रहे — तीन लोगों ने अपनी जान गंवाई और सैकड़ों घायल हुए।”

उन्होंने कहा कि “रथयात्रा में 10,000 पुलिसकर्मी, 21 एसपी रैंक अधिकारी और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त थे। प्रत्येक रथ के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होता है। बावजूद इसके हादसा भगवान जगन्नाथ के रथ के पास हुआ।”


⚠️ प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि रात 12 बजे भगवान का “पहुड़” किया गया और दर्शन बंद कर दिए गए, जिससे लाखों भक्त वंचित रह गए और अगले दिन सुबह अचानक भीड़ उमड़ पड़ी।
इसी बीच चारमाल से आए ट्रक के प्रवेश से अफरा-तफरी मच गई और हादसा हुआ।

“अगर ‘पहुड़’ दो घंटे देर से किया जाता, तो यह घटना टल सकती थी,” कांग्रेस नेताओं का कहना है।

उन्होंने सवाल किया कि उस समय कौन-कौन से अधिकारी ड्यूटी पर थे, इसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है।


🔍 “उच्च स्तरीय समिति की भूमिका संदिग्ध”

जयश्री पात्रा ने कहा —
“जब नुआपाड़ा उपचुनाव पर सबकी नज़र थी, तब इस रिपोर्ट को जारी करना ‘एक तीर से दो निशाने साधने’ जैसा है —
पहला, नुआपाड़ा से ध्यान हटाकर चुनावी लाभ लेना, और
दूसरा, दोषियों को बचाने का अवसर बनाना।”

उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिड़ा की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति की भूमिका पर भी सवाल उठता है।
“क्या समिति जांच कर रही थी या होटल में भोज और पास वितरण में व्यस्त थी?” पात्रा ने तंज कसा।

उन्होंने आगे कहा —
“रिपोर्ट में छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर उच्च पदस्थ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को ‘क्लीन चिट’ दी गई है। साथ ही CCTV रिकॉर्डिंग के सत्यापन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।”


⚖️ कांग्रेस की मांग

कांग्रेस ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की मांग की है और कहा कि प्रशासनिक विफलता तथा मुख्यमंत्री की अनभिज्ञता इस दुर्घटना की प्रमुख वजह रही है।(PNS)


 

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