
नई दिल्ली, 01 अप्रैल 2026:
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय बहुल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) योजना का व्यापक विस्तार किया गया है। इस संबंध में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुअल ओराम ने राज्यसभा में एक वक्तव्य प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 के बजट में EMRS योजना के विस्तार की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के अनुसूचित जनजाति (ST) के बच्चों को उनके सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके तहत ऐसे प्रत्येक ब्लॉक में EMRS स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया, जहां 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी और कम से कम 20,000 जनजातीय व्यक्ति (जनगणना 2011 के अनुसार) निवास करते हैं।
सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देशभर में कुल 728 EMRS (जिसमें 288 पुराने विद्यालय शामिल हैं) स्थापित करने को मंजूरी दी है। वर्तमान में 723 EMRS स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 499 विद्यालय संचालित हैं तथा 458 विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि EMRS की स्थापना ब्लॉक-स्तरीय ‘ट्विन क्राइटेरिया’ के आधार पर की जा रही है। कई जनजातीय बहुल जिलों में आवश्यकता के अनुसार एक से अधिक EMRS भी स्वीकृत किए गए हैं। विद्यालयों की संख्या और उनकी आवश्यकता की समीक्षा समय-समय पर निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है।
सरकार का यह प्रयास दूरस्थ एवं वंचित जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। EMRS योजना के माध्यम से सरकार जनजातीय छात्रों के लिए समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। (PNS Bureau)




