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खरीफ तैयारियों को केंद्र सरकार ने दी रफ्तार; केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस वार्ता को किया संबोधित

“खरीफ सम्मेलन में ‘टीम एग्रीकल्चर’ एकजुट होकर भारतीय कृषि का भविष्य तय कर रही है” — श्री शिवराज सिंह चौहान

“हर राज्य की खेती का मॉडल अलग, क्षेत्रीय रणनीति समय की मांग” — केंद्रीय कृषि मंत्री

“देश ने 376 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया”

“भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बना, चीन को पीछे छोड़ा”

“दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”

“जलवायु परिवर्तन से डिजिटल खेती तक, खरीफ सम्मेलन तैयार करेगा नई कृषि रूपरेखा”

PNS, नई दिल्ली, 28 मई 2026

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ फसलों की तैयारियों को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर भारतीय कृषि को नई दिशा देने के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि खरीफ सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य की व्यापक रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है।

श्री चौहान ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों की कृषि परिस्थितियां, जलवायु, मिट्टी और फसल प्रणाली अलग-अलग हैं, इसलिए प्रत्येक राज्य के लिए क्षेत्रीय कृषि रणनीति तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “वन साइज फिट्स ऑल” मॉडल कृषि क्षेत्र में प्रभावी नहीं हो सकता।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने इस वर्ष 376 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है और इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता देश को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए उन्नत बीज, तकनीकी सहायता, बेहतर बाजार व्यवस्था और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

श्री चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, आधुनिक तकनीक, डिजिटल खेती और कृषि नवाचार जैसे विषय आगामी कृषि नीति और खरीफ रणनीति के केंद्र में रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘टीम एग्रीकल्चर’ की भावना के साथ केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक संस्थान और कृषि विशेषज्ञ मिलकर देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।


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