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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पातंजलि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा — वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम भारत की पहचान

PNS Bureau :- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पातंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया और छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परम्पराएँ जैसे योग, आयुर्वेद और संस्कृत आज आधुनिक विज्ञान के साथ मिलकर एक नए युग का निर्माण कर रही हैं।


🕉️ “योग और आयुर्वेद भारत की आत्मा हैं” — राष्ट्रपति मुर्मू

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा —

“योग और आयुर्वेद केवल उपचार के साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने की विधा हैं। भारत का कर्तव्य है कि वह इन परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाए।”

उन्होंने इस बात की सराहना की कि पातंजलि विश्वविद्यालय ने पारंपरिक वैदिक ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान, टेक्नोलॉजी और जीवन-शैली सुधार के साथ जोड़ा है।


🌿 ‘स्वस्थ परिवार से स्वस्थ राष्ट्र’ का संदेश

राष्ट्रपति ने छात्रों से आह्वान किया कि वे समाज के स्वास्थ्य और नैतिकता के क्षेत्र में योगदान दें।

“व्यक्ति का विकास परिवार से शुरू होता है। जब परिवार स्वस्थ होगा, तभी समाज और राष्ट्र भी स्वस्थ बनेगा।”

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, और सामाजिक समरसता जैसे वैश्विक मुद्दों के समाधान में करना चाहिए।


🧘‍♀️ पातंजलि विश्वविद्यालय की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पातंजलि विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रम भारत की गुरुकुल परंपरा को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं।

“यह विश्वविद्यालय वैदिक और वैज्ञानिक शिक्षा का ऐसा संगम प्रस्तुत कर रहा है, जो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संस्थान भारत को “विश्वगुरु” बनाने के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।


📘 पृष्ठभूमि

पातंजलि विश्वविद्यालय की स्थापना योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करना है।
विश्वविद्यालय में योग, आयुर्वेद, संस्कृत, प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय दर्शन पर आधारित उच्च शिक्षा के कई कोर्स संचालित हैं।


✍️ संपादकीय दृष्टि से

राष्ट्रपति का यह दौरा उस समय हुआ है जब भारत “जागतिक आयुर्वेद नवाचार सप्ताह 2025” और “जनजातीय गौरव पखवाड़ा” जैसे राष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी कर रहा है।
उनका संदेश स्पष्ट था —

“भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ना ही नए भारत की सच्ची दिशा है।”

(PNS)

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